Pithoragarh News: आजादी के 78 साल बाद भी पिथौरागढ़ का कनार गांव एक ऐसे टापू की तरह है, जिसका दुनिया से कोई सीधा नाता नहीं है. यहां के ग्रामीण आज भी 18 किलोमीटर का जानलेवा पैदल सफर तय करने को मजबूर हैं. गर्भवती महिलाओं और बीमारों को कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाते-पहुंचाते युवाओं के कंधे छिल चुके हैं, लेकिन सिस्टम की नींद नहीं टूट रही. अस्कोट सेंचुरी के नियमों में उलझी सड़क की इस मांग को लेकर अब ग्रामीणों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है.






