
नई दिल्ली दिनांक 5/5/2022 को भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थानम् वाराणसी के तत्वावधान में नवम अखिल भारतीय वैदिक ज्योतिष और वास्तु एवं दीक्षांत समारोह 2022 का नई दिल्ली स्थित YWCA OF DELHI निकट बंगला साहिब अशोका रोड नई दिल्ली में आयोजन किया गया सम्मेलन स्थल दिल्ली जिसे की प्राचीन समय प्राचीन समय में इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था वहां पर याज्ञवल्क्य सभा भवन में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता गुजरात के वैदिक कर्मकाण्ड एवं ज्योतिषाचार्य डा हर्षदभाई जी ने की कार्यक्रम का संचालन एवं निर्देशन संस्थानम् के चेयरमैन संस्थापक एवं डा पुरूषोत्तम दास गुप्ता जी एवं संस्थानम् की निर्देशिका डॉक्टर विजयलक्ष्मी गुप्ता जी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया । मंच की शोभा बढ़ाने में देहरादून के ज्योतिषी डा पीपीएस राणा, अल्मोड़ा के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डा मदन मोहन पाठक,डा कुश सेन, आचार्य चंचल शर्मा सहित अन्य विद्वान उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारत के कोने से आए मूर्धन्य विद्वान ज्योतिषियों ने अपने अपने शोध प्रस्तुत किए कार्यक्रम की शुरुआत गणपति पूजन से हुई पूजा संस्थानम् के पुरोहित आचार्य डॉक्टर मदन मोहन पाठक अल्मोड़ा उत्तराखंड एवं संस्थानम् की निर्देशिका डॉक्टर विजयलक्ष्मी गुप्ता एवं कार्यक्रम आयोजन कर रही आचार्य चंचल शर्मा ने संयुक्त रूप से संपन्न कराईं तत्पश्चात दीप प्रज्वलन मंचासीनस्थों द्वारा किया गया पुनः स्वतिवाचन एवं अध्यक्षीय अभिभाषण डा हर्षद भाई जोशी जी द्वारा हुआ।
इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई इस दौरान वक्ताओं ने ज्योतिष शास्त्र जो भूत वर्तमान एवं भविष्य काल का वाचक है तो क्या ज्योतिष के प्रादुर्भाव का यही मूल कारण था..? और ग्रह दोष निवारण तथा ग्रह दोष शांति के यथार्थ अंतर की तात्विक विवेचना इस पर भी चर्चा की गई ज्योतिष सूत्रों से घटनाओं के स्वरूप निर्धारण के प्रायोगिक उदाहरण पर चर्चा की गई इसके अलावा ग्रह पिंडो में मानवीय संवेदना नहीं होती है तो दान व्रत पूजा मंत्र अनुष्ठान का रहस्य क्या है ,?? विंशोत्तरी दशा क्रम से जातक की भूत वर्तमान एवं भविष्य काल की रूपरेखा ज्ञान का औपचारिक विवेचना भी इसमें की गई फलित ज्योतिष में नक्षत्रों का क्या योगदान है क्या महत्व है इस पर भी कार्यक्रम में चर्चा की गई और साथ में वास्तु दोषों में पंच तत्वों का क्या महत्व है शिति जल पावक गगन समीरा पंच रचित अति अधम शरीरा आकाश वायु अग्नि जल पृथ्वी इनके माध्यम से वास्तु की विवेचना हुई भारतीय वैदिक ज्योतिष स्थानम सदैव ज्योतिष शास्त्र के तर्क संगत एवं वैज्ञानिक पद्धति से इसकी विवेचना करता है और करता आया है इससे पूर्व 8 जो वार्षिक अधिवेशन है वह हो चुके हैं यह नवम वार्षिक अधिवेशन यहां पर मनाया गया वक्ताओं ने बहुत ही सटीक भविष्यवाणियां बहुत ही सटीक व्यवस्थाओं के अनुसार अपने-अपने पक्ष रखें और संपूर्ण ज्योतिषियों द्वारा जो कि पूरे भारतवर्ष के हर राज्यों से आकर यहां उपस्थित थे सभी ने एक स्वर में ज्योतिष को विज्ञान मानते हुए हर वक्ता के शोध पत्रों का एक स्वर में समर्थन किया सभी की राय रही कि हर ज्योतिष को अपनी विद्या पर गर्व होना चाहिए धर्म संस्कृति संस्कार द्वारा ज्योतिष को समाज की सेवा करनी चाहिए कार्यक्रम में चार चांद लगाते हुए संस्थानम् की निर्देशिका डॉक्टर विजयलक्ष्मी गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया और रूद्राअष्टाध्यी से महत्वपूर्ण श्लोकों का सुन्दर प्रस्तुतिकरण किया और ज्योतिष के अठारह विद्वान ऋषियों का धन्यवाद किया साथ ही ज्योतिषयों को कहा कि आप भी कुछ ऐसा कीजिए जिससे आपका नाम भी आदर के साथ इन मनीषियों के साथ आदर से लिया जाय डाक्टर पुरूषोत्तम दास गुप्ता ने ज्योतिष शास्त्र पर अद्भुत और सटीक विश्लेषण करते हुए इस शास्त्र पर बहुत ही सरस व्याखान प्रस्तुत किया साथ ही ज्योतिष विद्वानों को निर्देश दिए की इस शास्त्र की पवित्रता को बनाए रखें और अनर्गल उपचारों से बचें भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान वाराणसी द्वारा प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी ज्योतिष शास्त्र कर्मकांड सहित अनेक विधाओं पर नियमित आनलाइन और पत्राचार के माध्यम से कोर्स कर अपना जीवन धन्य कर रहे हैं कार्यक्रम में अनेक विद्वानों एवं विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान दिया गया।






