माँ भारती वंदन तुमको,
हम मिलकर शीश झुकाते हैं ।
है अमृत महोत्सव आजादी का,
मिलकर जश्न मनाते हैं।
यह तेरी जमीन उगले सोना,
तूने हीरे जैसे लाल जने ।
तू शेरों की मां कहलाई,
सरहद के पहरेदार बने।
है वीर नारियों की भूमि ,
बलिदान दिया पर झुकी नहीं।
सीमाओं पर डटी रही,
पर बाधाओं से रुकी नहीं ।
पूरी दुनिया नतमस्तक है,
जहां तेरा ध्वज लहराया है।
लाख शहादत दे कर के,
हमने यह तिरंगा पाया है।।
गीता जोशी






