अल्मोड़ा, 22 अगस्त।
जुट प्रशिक्षण केंद्र, धारानौला में शुक्रवार को नाबार्ड के तत्वावधान में 11वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कारीगरों की कला और सृजनशीलता को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अल्मोड़ा उपस्थित रहे। उन्होंने हथकरघा और हस्तशिल्प को केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया। सीडीओ ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 6 कारीगरों को सम्मानित करते हुए उत्पादों के विपणन और निर्यात की संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि कारीगर अपने उत्पादों को व्यक्तिगत और विशेष पहचान देकर उनकी माँग बढ़ा सकते हैं।
योजनाओं की जानकारी और सहयोग का आश्वासन
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (DDM) गिरीश पंत ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और आश्वासन दिया कि ग्रामीण कारीगरों को बाजार से जोड़ने और स्वरोजगार बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।
वस्त्र मंत्रालय के हस्तशिल्प विभाग की सहायक निदेशक और जिला उद्योग केंद्र (DIC) के महाप्रबंधक ने भी संबोधित किया। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी और आर्टिजन कार्ड के लाभों के बारे में विस्तार से बताते हुए कारीगरों से पंजीकरण कराने की अपील की।
प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम स्थल पर बांस उत्पाद, शॉल, ताम्र शिल्प और ऐपन कला से जुड़ी कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे अतिथियों और प्रतिभागियों ने खूब सराहा।
संस्थागत सहयोग का भरोसा
लोक चेतना विकास समिति के सचिव ने आश्वासन दिया कि नए व्यवसाय शुरू करने या किसी भी सहायता की आवश्यकता होने पर उनकी संस्था कारीगरों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर विपणन और व्यवसाय विस्तार में पूरा सहयोग करेगी।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने सीडीओ समेत सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया।

