✍️ वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य — डॉ. मदन मोहन पाठक
🕉️ दैनिक पंचांग विवरण अल्मोड़ा / हल्द्वानी
दिनांक : 23 जनवरी 2026 | शुक्रवार
ॐ श्री गणेशाय नमः श्री विक्रम संवत् : 2082
श्री शाके : 1947 वर्ष : सिद्धार्थी नाम संवत्सर
आयन : रवि उत्तरायण ऋतु : शिशिर ऋतु
मास : माघ मास दिन 10 गते शुक्रवार
तिथि : माघ शुक्ल पक्ष पंचमी
🌼 श्री वसन्त पंचमी 🌼 माता सरस्वती जयंती
आनन्दादि योग : मध्य योग नाम : ध्वांक्ष
🌙 चन्द्र गोचर
चन्द्रमा प्रातः 8 बजकर 34 मिनट से मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
⛔ राहुकाल
प्रातः 11:01 बजे से 12:21 बजे तक
➡️ इस समय समस्त शुभ एवं मांगलिक कार्य वर्जित।
✅ शुभ मुहूर्त (मुहूर्तराज अभिजित)
प्रातः 11:59 बजे से 12:41 बजे तक
➡️ सभी शुभ, धार्मिक, शैक्षणिक एवं मांगलिक कार्यों हेतु श्रेष्ठ।
🌸 सरस्वती जयंती का आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
वसन्त पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, अपितु यह ज्ञान, विवेक, सद्बुद्धि और दिव्य वाणी के अवतरण का दिव्य अवसर है। शास्त्रों के अनुसार इसी पावन तिथि को माता सरस्वती ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुईं और उन्होंने सृष्टि को वाणी, विद्या, तर्क, संगीत और शास्त्रों का ज्ञान प्रदान किया।
जहाँ सरस्वती हैं वहाँ अज्ञान का नाश होता है, और जहाँ ज्ञान है वहाँ जीवन में संतुलन, शांति और सन्मार्ग स्वतः प्राप्त होता है।
🌼 माता लक्ष्मी एवं माता सरस्वती का संयुक्त पूजन
बहुत से लोग केवल सरस्वती पूजन को ही पर्याप्त मानते हैं, किंतु शास्त्रों में वर्णित है कि—
“लक्ष्मी बिना सरस्वती के भोग देती हैं
और सरस्वती बिना लक्ष्मी के वैराग्य।”
जब माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की संयुक्त कृपा होती है, तब व्यक्ति को—
धन के साथ विवेक
विद्या के साथ संस्कार
समृद्धि के साथ धर्म प्राप्त होता है।
👶 बच्चों एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष फल
आज के युग में बच्चों में—
एकाग्रता की कमी
चंचलता
मोबाइल एवं मानसिक तनाव
संस्कारों का ह्रास
देखने को मिल रहा है।
सरस्वती जयंती पर विधिवत पूजन से बच्चों को—
✔️ सद्बुद्धि
✔️ स्मरण शक्ति
✔️ विद्या में रुचि
✔️ परीक्षा एवं प्रतियोगिता में सफलता
✔️ मधुर वाणी और आत्मविश्वास
की प्राप्ति होती है।
🔱 मंत्र शास्त्र, वाक् सिद्धि एवं साधना का श्रेष्ठ दिन
वसन्त पंचमी—
मंत्र दीक्षा
विद्यारम्भ
लेखन प्रारम्भ
साधना एवं जप
के लिए अत्यंत सिद्धिदायक मानी गई है।
इस दिन जपा गया मंत्र शीघ्र फल देता है और साधक को वाक् सिद्धि एवं आध्यात्मिक तेज प्रदान करता है।
🕉️ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि
शास्त्रों में चार पुरुषार्थ बताए गए हैं—
धर्म — सद्बुद्धि से
अर्थ — लक्ष्मी कृपा से
काम — संयम से
मोक्ष — ज्ञान और विवेक से
सरस्वती जयंती पर माता लक्ष्मी एवं सरस्वती की संयुक्त उपासना से चारों पुरुषार्थों का संतुलित लाभ प्राप्त होता है।
🪔 आज का विशेष उपाय (सभी राशियों हेतु)
🔸 माता लक्ष्मी की पूजा करें
🔸 घर में घी का दीपक जलाएँ
🔸 लक्ष्मी माता को सिंदूर एवं श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
🔸 बच्चों से “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जप कराएँ
➡️ विशेष रूप से सद्बुद्धि, धन, स्वास्थ्य एवं पारिवारिक शांति प्राप्त होगी।
🌼 पीत रंग का महत्व
पीला रंग—
ज्ञान
सकारात्मक ऊर्जा
मानसिक प्रसन्नता
का प्रतीक है।
आज पीत वस्त्र, पीत पुष्प, हल्दी, केसर एवं पीले मिष्ठान अर्पित करने से जीवन में उजास आता है।
✨ निष्कर्ष
सरस्वती जयंती हमें यह सिखाती है कि—
विद्या बिना विवेक अंधकार है
और धन बिना धर्म विनाश का कारण।
अतः इस पावन तिथि पर हम सभी माता सरस्वती से ज्ञान, माता लक्ष्मी से सद्बुद्धि व संतुलित समृद्धि की कामना करें, ताकि समाज और आने वाली पीढ़ी संस्कारवान, मेधावी और सन्मार्गगामी बने।
🙏 माता सरस्वती एवं माता लक्ष्मी सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
🌼 सरस्वती जयंती एवं श्री वसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
✍️ डॉ. मदन मोहन पाठक वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य






