— वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित डॉक्टर मदन मोहन पाठक
अल्मोड़ा/हल्द्वानी। आगामी 3 मार्च 2026 को लगने वाला खग्रास चंद्रग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. मदन मोहन पाठक के अनुसार इस ग्रहण का सूतक काल प्रातः 6 बजकर 20 मिनट से प्रारम्भ हो जाएगा। सूतक लगने के बाद से लेकर ग्रहण के मोक्ष तक बालक, वृद्ध और रोगियों को छोड़कर अन्य लोगों के लिए भोजन करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर स्पर्श करेगा। ग्रहण का मध्य काल सायं 5 बजकर 3 मिनट पर रहेगा तथा मोक्ष सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। इस अवधि में श्रद्धालुओं को संयम, साधना और ईश्वर स्मरण करने की सलाह दी गई है।
पं. डॉ. पाठक बताते हैं कि सनातन परंपरा में ग्रहण काल को आध्यात्मिक साधना का विशेष समय माना गया है। इस दौरान ॐ नमः शिवाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः, ॐ चंद्रमसे नमः तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना जाता है। ग्रहण काल में किया गया जप, तप और ध्यान सामान्य समय की तुलना में कई गुना फल प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि ग्रहण के स्पर्श, मध्य और मोक्ष — इन तीनों कालों में स्नान करना शास्त्रों में अत्यंत शुभ बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य को अनेक कष्टों और असाध्य रोगों से राहत मिल सकती है तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।
जिन व्यक्तियों की कुंडली में चंद्र ग्रहण दोष है, उन्हें ग्रहण काल में विशेष रूप से दान-पुण्य करना चाहिए। अन्न, वस्त्र, दक्षिणा तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। ग्रहण समाप्त होने के बाद सफेद एवं काली वस्तुओं का दान करने से भी विशेष लाभ प्राप्त होता है।
डॉ. पाठक ने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ग्रहण काल में अनावश्यक बाहर न निकलें और आकाश की ओर देखने से बचें। इस समय भगवान शिव की स्तुति, मंत्र जाप और सकारात्मक विचारों में समय बिताना उत्तम माना जाता है।
राशियों के प्रभाव के विषय में उन्होंने बताया कि यह चंद्रग्रहण मेष, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए मध्यम फल देने वाला रहेगा। वहीं वृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए यह अपेक्षाकृत शुभ संकेत देने वाला माना जा रहा है। जिन राशियों पर इसका प्रभाव कुछ अशुभ माना गया है, उन्हें स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा अनावश्यक यात्रा या भ्रमण से बचना चाहिए।
अंत में पंडित डॉ. मदन मोहन पाठक ने कहा कि ग्रहण केवल खगोलीय घटना ही नहीं बल्कि आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक साधना का अवसर भी है। यदि इस समय को सकारात्मक भाव, मंत्र जाप, दान और ध्यान के साथ बिताया जाए तो जीवन में शांति, ऊर्जा और शुभता का संचार होता है।





