Sunday, October 4, 2026
Devbhoomi News service
Advertisement
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • ज्योतिष
  • धार्मिक
  • खेल
  • मौसम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • रोजगार
  • कृषि
  • व्यापार
No Result
View All Result
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • ज्योतिष
  • धार्मिक
  • खेल
  • मौसम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • रोजगार
  • कृषि
  • व्यापार
No Result
View All Result
Devbhoomi News service
No Result
View All Result

October 4, 2026

ये कैसी आस्था, कैसा विश्वास? कैंची के जाम ने पहाड़ की जिंदगी रोक दी —वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन पाठक

News Deskby News Desk
in उत्तराखंड, देश, धार्मिक, राजनीति, रोजगार, व्यापार, शिक्षा
0
ये कैसी आस्था, कैसा विश्वास? कैंची के जाम ने पहाड़ की जिंदगी रोक दी —वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन पाठक
ख़बर शेयर करें -

लेखक—वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन पाठक
हल्द्वानी-भवाली-अल्मोड़ा मार्ग कभी पहाड़ की जीवनरेखा हुआ करता था। अल्मोड़ा से हल्द्वानी और हल्द्वानी से अल्मोड़ा का सफर सामान्य परिस्थितियों में करीब तीन घंटे में पूरा हो जाता था, लेकिन आज यही सफर कैंची क्षेत्र में लगने वाले जाम के कारण कई बार आठ से दस घंटे तक पहुंच रहा है। सवाल केवल यातायात का नहीं है, सवाल यह है कि आखिर इस अव्यवस्था की कीमत कौन चुका रहा है?
कैंची क्षेत्र में बढ़ती भीड़ और लगातार लग रहे जाम ने अल्मोड़ा के साथ-साथ पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों तक के लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। सड़क पर घंटों वाहन खड़े रहते हैं। यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और सबसे बड़ी चिंता यह है कि आवश्यक सेवाएं भी इस जाम की चपेट में आ गई हैं।
दूध, सब्जी, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरी सामग्री लेकर आने वाले वाहन समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। पहाड़ों में जहां पहले से ही बाजारों तक सामान पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है, वहां घंटों के जाम ने आम आदमी की परेशानी और बढ़ा दी है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब एम्बुलेंस जाम में फंस जाती है। किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। प्रसव पीड़िता को अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाए तो इसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं, इसकी कल्पना मात्र से मन कांप उठता है। क्या ऐसी परिस्थितियों में सड़क पर लगने वाली भीड़ से बड़ा कोई धार्मिक पुण्य हो सकता है?
इसी तरह सेना में महत्वपूर्ण ड्यूटी पर तैनात जवानों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है। ट्रेन या बस छूट जाने का अर्थ केवल एक यात्री की परेशानी नहीं, बल्कि उसकी ड्यूटी और जिम्मेदारी प्रभावित होना है। विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं, नौकरी, कार्यालय और व्यावसायिक कार्यों के लिए एक दिन में आने-जाने वाले लोगों को मजबूरी में होटल में रुकना पड़ रहा है। इससे समय के साथ-साथ उनकी जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
आस्था के नाम पर व्यवस्था को क्यों भूल रहे हैं?
कैंची धाम के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा का सम्मान होना चाहिए। बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति देश-विदेश में करोड़ों लोगों की श्रद्धा है। श्रद्धालुओं का यहां आना स्वाभाविक है। लेकिन आस्था और अव्यवस्था को एक-दूसरे का पर्याय नहीं बनाया जा सकता।
आस्था तभी सार्थक है, जब उससे किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में संकट पैदा न हो।
भगवान को पाने के लिए किसी बीमार व्यक्ति को घंटों सड़क पर तड़पाना, किसी प्रसव पीड़िता को अस्पताल पहुंचने से रोक देना, किसी विद्यार्थी की परीक्षा या पढ़ाई प्रभावित कर देना अथवा किसी जवान की ट्रेन छूट जाना निश्चित रूप से किसी धार्मिक भावना की सफलता नहीं हो सकती।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयं से सवाल करें—ये कैसी आस्था है और कैसा विश्वास है, जिसके कारण स्थानीय जनता अपने ही घरों तक पहुंचने के लिए आठ-दस घंटे सड़क पर फंसी रहने को मजबूर हो?
भगवान घट-घट में हैं, चमत्कार के लिए भगदड़ क्यों?
श्रद्धा मन की भावना है। भगवान किसी एक स्थान, भवन या सड़क तक सीमित नहीं हैं। सनातन परंपरा तो यही कहती है कि परमात्मा कण-कण में और घट-घट में विद्यमान हैं।
यदि किसी श्रद्धालु की आस्था सच्ची है तो वह जहां है, वहीं से भगवान का स्मरण कर सकता है। किसी धार्मिक स्थल पर जाना श्रद्धा का विषय हो सकता है, लेकिन ऐसी भीड़ पैदा करना जिससे हजारों स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाए, निश्चित रूप से विचार का विषय है।
हाल के समय में फिल्मों, सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से धार्मिक स्थलों की लोकप्रियता बढ़ने के बाद भीड़ में तेजी से वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हुई है। लोकप्रियता बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन उसके अनुरूप सड़क, पार्किंग, यातायात नियंत्रण, वैकल्पिक मार्ग और आपातकालीन व्यवस्था विकसित न होना बेहद गंभीर कमी है।
क्या पहाड़ की जनता की कोई कीमत नहीं?
यह सवाल आज अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के हजारों लोगों के मन में है।
क्या पहाड़ की जनता को अपने घर पहुंचने के लिए आठ-दस घंटे सड़क पर खड़ा रहना पड़ेगा?
क्या किसी मरीज की जिंदगी जाम के भरोसे छोड़ दी जाएगी?
क्या बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा प्रभावित होती रहेगी?
क्या नौकरीपेशा लोगों को रोजाना अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ेगा?
क्या स्थानीय व्यापारियों और परिवहन कारोबारियों को इस अव्यवस्था का नुकसान उठाते रहना होगा?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या सरकार हर बार जाम लगने के बाद कुछ घंटों की व्यवस्था करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगी?
समाधान असंभव नहीं है
यदि सरकार और प्रशासन वास्तव में इच्छाशक्ति दिखाएं तो इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। कैंची क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान बनाया जाना चाहिए।
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग क्षेत्र विकसित किए जाएं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शटल सेवा और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाए। स्थानीय लोगों, आवश्यक सेवाओं, एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था हो।
विशेष अवसरों और अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में वाहनों के प्रवेश की संख्या को नियंत्रित करने, रूट डायवर्जन और समयबद्ध यातायात व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
स्थानीय निवासियों के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे अपने घरों, दुकानों, कार्यालयों और खेत-खलिहानों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ में न फंसें।
इसके अलावा अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए रियल टाइम ट्रैफिक सूचना व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि लोग जाम की स्थिति देखकर अपनी यात्रा की योजना बना सकें।
पर्यटन और आस्था बढ़े, लेकिन स्थानीय जीवन न रुके
कैंची धाम उत्तराखंड के लिए धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। स्थानीय दुकानदारों, होटल, टैक्सी और अन्य व्यवसायों को भी इससे रोजगार मिलता है।
लेकिन किसी भी धार्मिक या पर्यटन स्थल की सफलता का पैमाना केवल वहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या नहीं हो सकता। वास्तविक सफलता तब होगी जब श्रद्धालु भी सुरक्षित पहुंचें और स्थानीय जनता का जीवन भी सामान्य बना रहे।
सरकार को यह समझना होगा कि सड़क केवल पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए नहीं होती। वही सड़क किसी मां को अस्पताल ले जाती है, वही सड़क बच्चे को स्कूल पहुंचाती है, वही सड़क जवान को ड्यूटी तक ले जाती है और वही सड़क पहाड़ के गांवों तक जीवन की आवश्यक वस्तुएं पहुंचाती है।
अब स्थायी समाधान का समय है
सरकार से विनम्र लेकिन स्पष्ट आग्रह है कि इस समस्या को केवल रोजाना के ट्रैफिक जाम के रूप में न देखा जाए। यह अब जनजीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा गंभीर सार्वजनिक मुद्दा बन चुका है।
कैंची में लगने वाला जाम यदि इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए किसी बड़ी दुर्घटना, किसी मरीज की जान जाने या किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय अभी से स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान हो, लेकिन स्थानीय जनता के अधिकारों और जीवन की कीमत पर नहीं।
भगवान के दरबार में जाने वाले हर व्यक्ति को यह भी समझना होगा कि रास्ते में फंसा हुआ मरीज, अस्पताल जाती प्रसव पीड़िता, परीक्षा देने जाता विद्यार्थी, ड्यूटी पर जाता जवान और अपने घर लौटता पहाड़ी व्यक्ति भी उसी ईश्वर की संतान है।
इसलिए सवाल फिर वही है—
ये कैसी आस्था और कैसा विश्वास, जिसके कारण किसी दूसरे की जिंदगी मुश्किल में पड़ जाए?
सरकार को समय रहते जागना होगा। कैंची के जाम का स्थायी समाधान अब विकल्प नहीं, आवश्यकता है। यदि समय रहते ठोस व्यवस्था नहीं बनाई गई तो लगातार बढ़ती जनपीड़ा कभी बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती है।
आस्था भी रहे, व्यवस्था भी रहे और पहाड़ की जनता का जीवन भी सुगम रहे—यही वास्तविक विकास और सच्ची श्रद्धा होगी।

ख़बर शेयर करें -
Previous Post

दैनिक राशिफल एवं पंचाग आइए जानते हैं कैसा रहेगा आपका दिन

Search

No Result
View All Result

ताज़ा खबरें

  • ये कैसी आस्था, कैसा विश्वास? कैंची के जाम ने पहाड़ की जिंदगी रोक दी —वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन पाठक
  • दैनिक राशिफल एवं पंचाग आइए जानते हैं कैसा रहेगा आपका दिन
  • कृषि मेले में यूओयू का ज्ञान-विस्तार अभियान, ग्रामीणों और किसानों को निःशुल्क पुस्तकें देकर उच्च शिक्षा से जुड़ने का आह्वान
  • दैनिक राशिफल एवं पंचाग आइए जानते हैं कैसा रहेगा आपका दिन
  • गांधी-शास्त्री जयंती पर जिलेभर में हुए कार्यक्रम, डीएम ने दिलाई सत्य-अहिंसा और कर्तव्यनिष्ठा की याद

न्यूज़ बॉक्स में खबर खोजे

No Result
View All Result

विषय तालिका

  • Uncategorized
  • अपराध
  • आपदा प्रबंधन
  • आरोग्य
  • उत्तराखंड
  • कृषि
  • केरियर
  • खेल
  • चिकित्सा
  • ज्योतिष
  • देश
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
  • महाराष्ट्र
  • मुंबई
  • मौसम
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • शिक्षा

सम्पर्क सूत्र

मदन मोहन पाठक
संपादक

पता : हल्द्वानी - 263139
दूरभाष : +91-9411733908
ई मेल : devbhoominewsservice@gmail.com
वेबसाइट : www.devbhoominewsservice.in

Privacy Policy  | Terms & Conditions

© 2021 devbhoominewsservice.in

No Result
View All Result
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • ज्योतिष
  • धार्मिक
  • खेल
  • मौसम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • रोजगार
  • कृषि
  • व्यापार

© 2022 Devbhoomi News - design by Ascentrek, Call +91-8755123999

© 2026, Devbhoomi News service

Website Developed & Maintained by News Portal Hub

All content and news on this website are published solely by the website owner. News Portal Hub assumes no responsibility for its content.

News Portal Hub