नैनीताल। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के कार्यकाल के दौरान जनपद में राजस्व मामलों के निस्तारण, अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई, न्यायालयों में लंबित वादों के निपटारे और भूमि अभिलेखों में विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया से संबंधित आंकड़े प्रशासनिक गतिविधियों की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक जिले के विभिन्न न्यायालयों में कुल 37,383 वाद विचाराधीन रहे, जिनमें से 31,979 वादों का निस्तारण किया गया। इस अवधि में निस्तारण की दर 85.54 प्रतिशत रही, जबकि 5,404 वाद शेष रहे।
वहीं, 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक राजस्व प्रवर्तन समिति के अंतर्गत दर्ज 5,745 प्रकरणों में से 5,611 का निस्तारण किया गया। इस प्रकार कुल प्रकरणों में से लगभग 97.67 प्रतिशत मामलों का निपटारा दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त भूमि पैमाइश, मेड़ विवाद, सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण और विरासत दर्ज कराने जैसे नागरिकों से सीधे जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई।
राजस्व प्रवर्तन के 97 प्रतिशत से अधिक मामलों का निस्तारण
राजस्व प्रवर्तन समिति के आंकड़ों के अनुसार, संबंधित अवधि में कुल 5,745 प्रकरण दर्ज रहे। इनमें पूर्व से लंबित 5,603 प्रकरण और सप्ताह के दौरान प्राप्त 142 नए मामले शामिल थे। इनमें से 5,611 प्रकरणों का निस्तारण किया गया, जबकि 134 मामले शेष रहे।
अतिक्रमण और सार्वजनिक सुविधाओं से संबंधित मामलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। मार्गों पर अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण के 857 प्रकरणों में से 856 का निस्तारण किया गया। इस श्रेणी में केवल एक मामला लंबित रहा। सिंचाई गूलों पर अतिक्रमण के 83 मामलों में से 78 का निस्तारण हुआ, जबकि पांच मामले शेष रहे।
मार्ग निर्माण में बाधा से जुड़े 71 प्रकरणों में से 70 का निपटारा किया गया। वहीं, सार्वजनिक रास्तों और नहरों में अतिक्रमण से संबंधित सभी 100 मामलों के निस्तारण का विवरण उपलब्ध है। इन आंकड़ों से सार्वजनिक मार्गों, सिंचाई व्यवस्था और सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई का पता चलता है।
भूमि पैमाइश के 2,398 मामलों का निस्तारण
भूमि पैमाइश और सीमांकन से जुड़े मामले राजस्व प्रवर्तन की प्रमुख श्रेणियों में शामिल रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पैमाइश के कुल 2,491 प्रकरणों में से 2,398 का निस्तारण किया गया, जबकि 93 मामले लंबित रहे।
इसी तरह, मेड़ विवाद एवं खेतों की सीमाओं से संबंधित 957 प्रकरणों में से 945 का निपटारा हुआ और 12 मामले शेष रहे। कुर्री नक्शों से संबंधित 131 मामलों में से 117 का निस्तारण किया गया।
नाम संशोधन के 290 प्रकरणों में से 284 का समाधान हुआ, जबकि छह मामले लंबित रहे। अन्य श्रेणी के 765 प्रकरणों में से 763 का निस्तारण किया गया।
भूमि पैमाइश, सीमांकन, नाम संशोधन और अतिक्रमण से जुड़े मामले ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आम नागरिकों की भूमि संबंधी समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों का निस्तारण होने से संबंधित पक्षों को राजस्व प्रक्रियाओं में आगे बढ़ने में सुविधा मिलती है।
विभिन्न न्यायालयों में 85.54 प्रतिशत वाद निस्तारित
जिले के विभिन्न न्यायालयों में 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक कुल 37,383 वाद विचाराधीन रहे। इनमें से 31,979 वादों का निस्तारण किया गया, जबकि 5,404 वाद शेष रहे। इस अवधि में निस्तारण की दर 85.54 प्रतिशत दर्ज की गई।
न्यायालय कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट, नैनीताल के आंकड़ों के अनुसार, संबंधित राजस्व वर्ष में कुल 472 वाद दर्ज रहे। इनमें से 364 वादों का निस्तारण किया गया, जबकि 108 वाद लंबित रहे। इस श्रेणी में निस्तारण की दर 77.11 प्रतिशत रही।
उपलब्ध विवरण में जेडए एवं एलआर अधिनियम, गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट, उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, शस्त्र अधिनियम तथा अन्य संबंधित अधिनियमों के अंतर्गत दर्ज वाद शामिल हैं। इन आंकड़ों से न्यायालय स्तर पर राजस्व एवं अन्य संबंधित मामलों के निस्तारण की स्थिति सामने आती है।
चौपालों के माध्यम से विरासत दर्ज कराने पर जोर
भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने और मृतक खातेदारों के उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराने के लिए चौपालों के माध्यम से विरासत दर्ज करने की प्रक्रिया भी प्रशासनिक कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक की तहसीलवार उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मृतक खातेदारों की विरासत दर्ज करने के लिए 9,783 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त, विरासत दर्ज कराने से संबंधित कुल 18,906 खातों और 34,897 वारिसों एवं लाभार्थियों के नाम दर्ज किए जाने का विवरण प्रस्तुत किया गया है।
तहसीलवार आंकड़ों में नैनीताल, हल्द्वानी, रामनगर, कालाढूंगी, लालकुआं, धारी, खनस्यूं, श्री कैंचीधाम और बेतालघाट शामिल हैं। हल्द्वानी, नैनीताल और धारी समेत विभिन्न तहसीलों में विरासत संबंधी प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
विरासत दर्ज होने से राजस्व अभिलेखों में उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने तथा नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में सुविधा प्रदान करने में मदद मिलती है।
आंकड़ों में एक वर्ष के प्रशासनिक कार्यों की तस्वीर
उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, संबंधित अवधि में नैनीताल जिला प्रशासन के समक्ष राजस्व वादों के निस्तारण, भूमि पैमाइश, सीमांकन विवाद, अतिक्रमण हटाने, सार्वजनिक मार्गों से जुड़ी शिकायतों और विरासत दर्ज कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्य रहे। विभिन्न श्रेणियों में हजारों प्रकरणों का निस्तारण किया गया, हालांकि कुछ मामले अब भी लंबित हैं।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के कार्यकाल से संबंधित ये आंकड़े राजस्व एवं न्यायिक कार्यों में हुई प्रगति का आकलन करने का आधार प्रस्तुत करते हैं। प्रशासन की कार्यप्रणाली में इन मामलों का समयबद्ध निस्तारण और नागरिकों की शिकायतों का प्रभावी समाधान महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करना और नागरिकों की शिकायतों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के समाधान और राजस्व संबंधी मामलों के निस्तारण की दिशा में आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।



