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September 3, 2022

तीज त्यौहार व्रत पर्वों पर कैसे आएगी एकरूपता खुल गया राज

News Deskby News Desk
in उत्तराखंड, ज्योतिष
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तीज त्यौहार व्रत पर्वों पर कैसे आएगी एकरूपता खुल गया राज
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रामनगर  🪱 कालीनाग देवता की जय: ज्योतिष के मूर्धन्य विद्वान आचार्य डॉक्टर रमेश चंद्र जोशी जो कि सरल और मृदुभाषी हैं ज्योतिष शास्त्र के साथ कर्मकांड पर भी आपका एकाधिकार है आपने देवभूमि न्यूज पोर्टल और पर्वत प्रेरणा समाचार पत्र न्यूज पोर्टल को दिए अपने महत्वपूर्ण साक्षात्कार में ज्योतिष शास्त्र पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखकर सारे प्रदेशवासियों के संशय को खत्म किया इस बात के लिए देवभूमि न्यू सर्विस पोर्टल आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करती है आपने बिना किसी झिझक के स्पष्ट शब्दों में ज्योतिष शास्त्र के बारे में आ रही जो भी तीज त्यौहार और पर्वों पर अनियमितताओं को लेकर बातें चल रही हैं उनका अपने समाधान किया साथ ही आप ने एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू के दौरान आपने बेझिझक अपनी बात हमारे समक्ष रखी इसके लिए हमारी टीम आपको हार्दिक धन्यवाद देती है आप 2007 से लगातार ज्योतिष शास्त्र की सेवा कर रहे हैं और आप का पैतृक व्यवसाय भी कर्मकांड और ज्योतिष शास्त्र को लेकर ही है तो आप एक अन्य कर्मी होने के बावजूद आपने इस क्षेत्र में सदैव अपना प्रयास जारी रखा और उसी प्रयास के माध्यम से आप आज इस परम पद पर विराजमान हैं हमारी टीम पर्वत प्रेरणा और देवभूमि न्यू सर्विस आपके समक्ष आई और हम लोगों ने आपसे जानना चाहा कि तीज त्यौहार और व्रत पर्व को लेकर जो यह अनियमितताएं आ रही है आखिर क्यों इसका वास्तविक समाधान क्या है आपने हमारा स्वागत करते हुए क्योंकि आपके अंदर की योग्यता है वह झलकती है आपने बहुत ही नाम और विनम्र स्वभाव के साथ हमारा स्वागत किया और हमें अवगत कराया कि वास्तव में जो यह तीज त्यौहार व्रत पर्व को लेकर अनियमितता रही है इसका वास्तविक कारण यह है कि कुछ पंचांगकार केवल चली आ रही परंपरा के अनुसार एवं उचित अनुभव के अभाव में पंचांग का निर्माण करने से पहले कोई भी ध्यान नहीं रखते हैं और पूर्ववत रीसाइक्लिंग जैसे कि 60 वर्ष में एक पंचांग बिल्कुल उसी अवस्था में आता है तो लोग ऐसे ही उसको छाप दे रहे हैं ना कि उस पर किसी प्रकार का कोई विचार कर रहे हैं ना ध्यान दे रहे हैं और ना ही उन्हें ज्योतिष शास्त्र का कोई बृहद ज्ञान है  इस दुर्भाग्य के कारण आज  समाज भाई भाई तक अलग अलग पर्व मना रहे हैं यानि एक भाई  त्यौहार पर्व को आज मना रहा है तो एक भाई उसी त्योहार पर को कल मना रहा है यह अपने आप में एक बहुत दुखद स्थिति है जब हमारी टीम ने आदरणीय डॉ रमेश चंद्र जोशी से जानना चाहा कि क्या वास्तव में यह स्थिति क्यों बनती है तो उन्होंने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में इस बात की जानकारी दी और उन्होंने कहा कि मैं स्वयं गणना करता हूं और उन्होंने साक्ष्यों को भी प्रस्तुत किया जो उन्होंने वास्तव में अपने कलम और लेखनी के माध्यम से उन्होंने उनके घर ने की थी तो उन्होंने बताया कि इसकी गणना करनी पड़ती है और तीज त्यौहार व्रत पर्व सहित समस्त जो भी निर्णय होते हैं उनके लिए हुए अनेक प्रकार के ग्रंथों का सहारा लेते हुए इसका प्रतिपादन करते हैं और करते रहेंगे भगवत कृपा से उन्होंने नौ 10 साल से लगातार बृहद पंचांग का निर्माण और लघु पत्रिका का निर्माण 2007 से करते आ रहे हैं और उन्हें अनेक लोगों का सहयोग और आशीर्वाद प्राप्त है उन्होंने सभी साथियों का धन्यवाद किया जो पंचाग निर्माण कार्य में उनका सहयोग कर रहे हैं  ज्योतिष के विभिन्न शास्त्री प्रमाणों के साथ आचार्य डॉक्टर रमेश चंद्र जोशी ने हमारी टीम को संपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की उन्होंने कहा यथाशीघ्र वे संस्कृत विद्यालय के कुलपति जी से भी बात करेंगे जिसके बाद वह निर्णय लेंगे कि तीज पर्व में समरूपता कैसे लाई जाए साथ ही डॉक्टर जोशी ने कहा कि वह एक खास तौर पर ज्योतिर्विदों के परिषद का गठन करेंगे जिसमें ज्योतिष शास्त्र के मूर्धन्य विद्वानों को लिया जाएगा उन्होंने कहा की आज अनेक लोग ज्योतिष की दुकान लगा कर बैठें हैं एक तरह से आजकल  ज्योतिषियों का एक बड़ा जलसा बीछ गया है तो इस पर भी ध्यान आकर्षण होगा और सरकार के समक्ष से बात रखी जाएगी ताकि ज्योतिष का वास्तविक रूप समक्ष आ सके उन्होंने कहा कि ज्योतिष विज्ञान है ज्योतिष को विज्ञान इक्ता के साथ ही सिद्ध करना चाहिए उन्होंने अनेक मनीषियों ऋषि-मुनियों शास्त्रों के तर्कसंगत प्रमाण प्रस्तुत करते हुए हमें बताया कि कुछ लोग केवल और केवल अपनी बात रखने मात्र को निर्णय मान लेते हैं जो कि अपने आप में सक्षम नहीं है इसमें समरूपता का वैज्ञानिक रूप से प्रमाण सिद्ध करना होगा यही ज्योतिष शास्त्र की विजय होगी आचार्य डॉक्टर रमेश चंद्र जोशी ने यह भी कहा कि निकट भविष्य में इस समरूपता को लाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करेंगे और ज्योतिष परिषद का गठन करने के बाद वे प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उनके समक्ष संपूर्ण जानकारी रखेंगे इस प्रकार ज्योतिष शास्त्र को बचाया जा सकेगा और ज्योतिष शास्त्र एक बहुमूल्य शास्त्र है इस शास्त्र के माध्यम से मनुष्य जीवन की भूत भविष्य और वर्तमान में होने वाली घटनाओं की जानकारी तो प्राप्त करता ही है साथ ही उसे पल-पल पर आगे बढ़ने के लिए शास्त्र की जरूरत होती है आज अगर विवाह है नामकरण संस्कार है और यात्रा करनी है कोई मांगलिक कार्य करने हैं तो बिना ज्योतिष निर्णय के यह सिद्ध नहीं होते जन्म पत्रिका मिलान है जन्मपत्रिका मेलापक के बारे में भी उन्होंने जानकारी दी उन्होंने कहा कि जीवन में बहुत ही उपयोगी शास्त्र है और इसकी उपयोगिता सदैव बनी रहेगी चाहे समय कितना बदल जाए लेकिन ज्योतिष शास्त्र का स्वरूप नहीं बता सकता इस बारे में उन्होंने यथाशीघ्र इस पर बृहद कार्य करने की बात कही।

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