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January 9, 2023

कल मनाया जाएगा संकष्ट हर चतुर्थी व्रत जानिए गणेश जी की पूजा से मिलने वाले कोन कोन से लाभ हैं और कैसे की जाती है गणेश जी की पूजा

News Deskby News Desk
in उत्तराखंड, ज्योतिष
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अल्मोड़ा यहां के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित डॉक्टर मदन मोहन पाठक ने बताया कि संकष्ट हर चतुर्थी श्री गणेश जी का व्रत कल दिनांक 10 जनवरी 2023 को मनाया जाएगा भगवान गणेश मनुष्य के जीवन में रिद्धि और सिद्धि को देने वाले हैं मानव जीवन में आ रही अनेक प्रकार की समस्याओं का समाधान गणेश जी की पूजा करने मात्र से हो जाता है देवताओं में अग्र पूजे जाने वाले श्री गणेश शास्त्रों के अनुसार आपको हर कष्ट और संकट से बचाते हैं असाध्य से असाध्य रोग भी गणेश जी की पूजा अर्चना करने मात्र से दूर हो जाते हैं जो लोग श्री गणेश को नियमित दूर्वा चढ़ाते हैं तिल के लड्डू का भोग लगाते हैं घी का दीपक जलाते हैं उनके घर में सुख शांति रहती है प्रायः दो संकष्ट हर चतुर्थी महत्वपूर्ण मानी गई है एक माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एक भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी इसके अलावा गणेश चतुर्थी महीने में दो बार आती है एक शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष जो बड़ी गणेश चतुर्थी हैं इनका अपना पौराणिक महत्व है शास्त्रों के अनुसार श्री गणेश जो कि भगवान शिव के पुत्र हैं माता जिनकी पार्वती हैं भाई जिनके कार्तिकेय हैं अर्थात गणेश जी की पूजा करने मात्र से आपको सभी देवी देवताओं का सानिध्य प्राप्त हो जाता है किसी भी पूजा के आरंभ में हम श्री गणेश की पूजा अर्चना करते हैं तो हर कार्य निर्विघ्न ता पूर्वक संपन्न होता है गणेश जी के पिता भगवान शिव जो इस संसार में देवाधिदेव के नाम से पूजे जाते हैं और मनुष्य को हर संकट से बचाते हैं असाध्य रोग हां अल्पायु हो जो असाध्य रोग से पीड़ित हैं इसके अलावा अनेक प्रकार के कष्ट भगवान शिव दूर करते हैं माता पार्वती जो स्वयं आदिशक्ति मां भगवती जगत जननी जगदंबा है उनकी पूजा मात्र से मानव जीवन में सुख शांति ऐश्वर्य का वातावरण बना रहता है जिनकी संतान नहीं है उन्हें संतान की प्राप्ति होती है और घर पर लक्ष्मी का वास होता है जिनके विवाह में विलंब आ रहा हो मां गौरी की पूजा करने से शीघ्र विवाह हो जाता है गणेश जी की दो पत्नियां रिद्धि और सिद्धि है संपूर्ण ब्रह्मांड में रिद्धि और सिद्धि के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं हो सकता है जिस घर में रिद्धि और सिद्धि का वास नहीं है वह घर अत्यंत पीड़ादायक कष्ट से गुजरता है स्वयं श्री गणेश मनुष्य को हर प्रकार से संपन्न करते हैं ऐसे गणेश जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं जिनको तिल के लड्डू का भोग लगता है और गणेश जी पान सुपारी से प्रसन्न होते हैं दूर्वा चढ़ाने से मनुष्य के कुल की वृद्धि होती है धन ऐश्वर्य का लाभ होता है जिस घर में कष्ट संकट हो वह सब गणेश जी की पूजा करने मात्र से दूर हो जाते हैं क्योंकि गणेश की पूजा से संकट दूर होते हैं इसीलिए इस पूजा का नाम संकष्ट हर चतुर्थी है हमारे हिंदू धर्म में संकष्ट हर चतुर्थी का अपना एक विशेष महत्व होता है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान गणेश एवं चौथ माता का पूजन करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।गणेश जी की कृपा पाने के लिए वैसे तो इस व्रत को कोई भी कर सकता है,लेकिन अधिकांश सुहागन स्त्रियां ही इस व्रत को परिवार की सुख- समृद्धि के लिए करती हैं । नारद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान गजानन की आराधना से सुख-सौभाग्य में वृद्धि तथा घर -परिवार पर आ रही विघ्न -बाधाओं से मुक्ति मिलती है एवं रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। इस चतुर्थी में चन्द्रमा के दर्शन एवं अर्घ्य देने से गणेश जी के दर्शन का पुण्य फल मिलता है। जिन पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया चल रही है उन्हें यह व्रत रखना चाहिए।धन की इच्छा रखने वालों को हरे रंग के गणेशजी एवं जिनकी तबियत खराब रहती हो उन्हें लाल रंग के गणेशजी की पूजा करनी चाहिए।जिनकी संतान को किसी भी प्रकार का कष्ट हो,उन माताओं को इस दिन गणेशजी का व्रत एवं पूजा करनी चाहिए। विशेष लाभ रहेगा रात को चंद्रमा के दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस उपवास को तोड़ा जाता है भगवान श्री गणेश जी को शुद्ध जल से स्नान कराएं गंगाजल गाय के कच्चे दूध से स्नान कराएं भगवान गणेश जी का षोडशोपचार पूजन कराएं खास तौर पर श्री गणेश को 108 दुर्गा 108 अक्षत 108 तिल चढ़ाएं भगवान श्री गणेश जी के सम्मुख घी का दीपक जलाएं भगवान को पान सुपारी लोंग इलाइची जलाने का कपूर धूप निवेदित करें खासकर तिल के 8 या 11 लड्डू बनाकर भगवान को भोग लगाएं भगवान गणेश जी के नामों का गुणगान करें गणेश जी की आरती चालीसा पाठ पढ़े तदोपरांत चंद्रमा को अर्घ्य देवें चंद्रमा को दूध पंचामृत चढ़ाएं फिर शांति पाठ द्वारा संपूर्ण परिवार में जल से अभिषेक करें और लड्डू परिवार के लोगों को बांटे जिससे सभी लोग वर्ष भर स्वस्थ और सुखी रहेंगे

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