हल्द्वानी, 22 जनवरी 2026:
जनपद नैनीताल के निजी विद्यालयों द्वारा फीस निर्धारण, पाठ्य पुस्तकों और यूनिफॉर्म में अपनाए जा रहे व्यावसायिक रवैये पर उत्तराखंड शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायतों के बाद जारी आदेश संख्या 1/860/2026 के तहत जिलाधिकारी को प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग कर सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, राज्य शासनादेशों और सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालयों के फैसलों के अनुरूप उठाया गया है।
शिकायतों का आधार
निजी स्कूलों पर लाभ कमाने के लिए फीस में मनमानी वृद्धि, एक ही दुकान से यूनिफॉर्म और पुस्तकें खरीदने का दबाव, और बार-बार बदलाव करने के आरोप लगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन और इस्लामिक एकेडमी के मामलों में स्पष्ट किया कि शिक्षा परोपकारी है, व्यापार नहीं। उच्च न्यायालयों ने भी एकल विक्रेता बाध्यता को अनुचित व्यापार करार दिया है।
मुख्य निर्देश
फीस वृद्धि: अभिभावक/प्रबंध समिति की परामर्श प्रक्रिया अनिवार्य, लिखित औचित्य जरूरी; जिलाधिकारी जरूरत पड़ने पर वृद्धि रोक सकते हैं।
यूनिफॉर्म: किसी विशेष दुकान की बाध्यता निषिद्ध, बाजार में उपलब्ध डिजाइन का पालन अनिवार्य, बार-बार बदलाव वर्जित।
पुस्तकें: NCERT/SCERT पुस्तकों को प्राथमिकता, किसी पर दबाव नहीं, कापियों पर लोगो नहीं।
पारदर्शिता: फीस, पुस्तक और यूनिफॉर्म की सूची नोटिस बोर्ड/वेबसाइट पर प्रदर्शित करें; अतिरिक्त शुल्क वर्जित।
निरीक्षण: मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी चेकलिस्ट के अनुसार निरीक्षण करेंगे और रिपोर्ट जमा करेंगे।
कार्रवाई: उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी, मान्यता रद्द करने की संस्तुति, RTE के तहत दंड।
अभिभावक संगठनों की प्रतिक्रिया
अभिभावक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब निजी स्कूलों में मनमानी और अनावश्यक दबाव पर रोक लगेगी।






