Dehradun News: देहरादून की सड़कों पर पिछले 19 दिनों से सफेद दाढ़ी और झुर्रियों वाले चेहरे धरने पर बैठे हैं. ये कोई साधारण बुजुर्ग नहीं, बल्कि वो आंदोलनकारी हैं जिन्होंने लाठियां खाईं, तिहाड़ जेल की सलाखें गिनीं और अपना खून बहाकर इस राज्य को बनाया. आज रिटायरमेंट की उम्र में भी ये बुजुर्ग ‘गैरसैंण’ को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन कर रहे हैं. जानिए इन योद्धाओं का दर्द और क्यों 25 साल बाद भी उत्तराखंड अपनी पहचान के लिए लड़ रहा है.






