हल्द्वानी दिनांक 22 फरवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सकल सनातन समिति के तत्वावधान में एक भव्य विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज की सज्जन शक्ति को संगठित कर राष्ट्र और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संतों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे एक प्रेरणादायक आयोजन बना दिया।
कार्यक्रम का आयोजन श्री बाबा हैड़ाखान एवं पनियाली बस्ती वार्ड 38, लक्ष्मी वेंकट क्षेत्र में किया गया। कार्यक्रम का संयोजन नवीन भट्ट द्वारा किया गया, जबकि संचालन पूजा लटवाल और कमल किशन पांडे ने किया।
प्रमुख वक्ताओं के प्रेरक विचार
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. बृजेश बनकोटी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संपूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद संघ ने समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य किया है।
उन्होंने समाज में फैलाई जा रही विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी लोगों से जाति-पांति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों की 100 वर्षों की तपस्या, त्याग और सेवा के कारण समाज में सकारात्मक जागरण दिखाई दे रहा है।
साथ ही उन्होंने परिवार सुदृढ़ीकरण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विशेष जोर दिया।
संतों का संदेश
आध्यात्मिक गुरु दण्डी स्वामी शंकर गिरी जी महाराज, जो सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के परमाध्यक्ष एवं पीठाधीश्वर हैं, ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें अपनी मातृभूमि, संस्कृति और प्राचीन गौरव की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता और आध्यात्मिक परंपरा में निहित है।
उन्होंने कहा कि वेद समस्त ज्ञान का मूल स्रोत हैं और ईश्वर इस सृष्टि के प्रत्येक कण में विद्यमान है। हमें अपने मन, वचन और कर्म से किसी भी प्राणी को कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए, लेकिन धर्म और सत्य की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर साहस भी दिखाना चाहिए। उन्होंने भगवान राम के उदाहरण से बताया कि रामराज्य की स्थापना धर्म, न्याय और कर्तव्य पालन से ही संभव है।
मातृशक्ति की भूमिका
कार्यक्रम में महिला वक्ताओं ने भी महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने बताया कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से “पंच परिवर्तन” के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने पर बल दिया गया। इन पाँच प्रमुख आयामों में शामिल हैं—
कुटुंब प्रबोधन
पर्यावरण संरक्षण
नागरिक कर्तव्य
सामाजिक समरसता
स्वदेशी आधारित जीवन
उन्होंने कहा कि मां बच्चे की पहली शिक्षिका होती है, इसलिए वह बालकों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर देश के भावी नागरिकों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित कर सकती है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समा
सम्मेलन के दौरान आडर्न पब्लिक स्कूल, पैन्थन और मास्टर स्कूल के छात्र-छात्राओं ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
उन्होंने नंदा राजजात यात्रा, पारंपरिक कुमाऊँनी नृत्य, तथा झोड़ा-चांचरी प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया और स्थानीय परंपराओं की झलक भी दिखाई।
समाजसेवियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सज्जन शक्ति को सम्मानित भी किया गया। इससे समाज सेवा और सकारात्मक कार्यों के प्रति लोगों में प्रेरणा का संचार हुआ।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस अवसर पर अनेक सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से
नगर प्रचारक प्रभाकर, सह जिला बौद्धिक प्रमुख कमलेश, नगर बौद्धिक प्रमुख मनोज भट्ट, नगर प्रचार प्रमुख डॉ. नवीन शर्मा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, प्रमोद तोलिया, बेला तोलिया, सुरेश भट्ट, जिला पंचायत सदस्य डॉ. छवि काण्डपाल, प्रमोद बोरा, सौरभ पांडेय, नीरज पांडेय, मुकेश रघुवंशी, दिनेश सुयाल, दयानंद पांडे, बालम सिंह और मोहन सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।
सम्मेलन का संदेश
विराट हिन्दू सम्मेलन ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि संगठन, संस्कृति, सेवा और समरसता के माध्यम से ही एक मजबूत और जागरूक राष्ट्र का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रहित के प्रति लोगों में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।





