अल्मोड़ा, 13 फरवरी 2026।
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील, व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। शासन ने ‘मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसर’ संवर्ग के कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए उनके नए दायित्व और कार्य-प्रणाली (जॉब डिस्क्रिप्शन) तय कर दिए हैं। अब यह संवर्ग केवल मरीजों की सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चिकित्सा संस्थानों की प्रशासनिक एवं नीतिगत व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभाएगा।
प्रबंधन और नीति-निर्धारण में होगी अहम भूमिका
सचिव सचिन कुर्वे द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसर को उच्च-स्तरीय प्रबंधकीय जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ये अधिकारी मेडिकल कॉलेजों की प्रशासकीय टीम का हिस्सा बनकर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने हेतु डेटा विश्लेषण, फीडबैक और नीतिगत सुझाव देंगे। शासन द्वारा जारी जॉब चार्ट के तहत विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन, निगरानी और सुपरविजन की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर होगी, जिससे संस्थानों का प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सके।
मास्टर ट्रेनर के रूप में नई पहचान
नई व्यवस्था में यह संवर्ग मेडिकल, पैरामेडिकल और नर्सिंग छात्रों के लिए ‘मास्टर ट्रेनर’ की भूमिका निभाएगा। विशेष रूप से फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम (FAP) के अंतर्गत छात्रों को सामुदायिक चिकित्सा और सामाजिक स्वास्थ्य के व्यावहारिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अस्पताल प्रशासन के साथ मिलकर स्वास्थ्य नीतियों के डिजाइन, मूल्यांकन और क्रियान्वयन में भी ये अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
योजनाओं का लाभ और पुनर्वास पर फोकस
आयुष्मान भारत सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ कैंसर, टीबी और एचआईवी जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए परामर्श, मार्गदर्शन और पुनर्वास सेवाओं का नेतृत्व भी सोशल वेलफेयर ऑफिसर करेंगे।
अस्पताल और समाज के बीच बनेंगे सेतु
मरीजों के डिस्चार्ज के बाद फॉलो-अप, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों और ग्रामीण स्तर तक सेवाओं के विस्तार में इनकी भूमिका अहम होगी। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली अधिक मरीज-केंद्रित बनेगी और विशेषकर गरीब एवं असहाय मरीजों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।
दवा के साथ मिलेगा सही मार्गदर्शन
शासन के अनुसार, सोशल वेलफेयर ऑफिसर की सक्रिय भागीदारी से मरीजों को एक ही छत के नीचे इलाज, आर्थिक सहायता से जुड़ी जानकारी और उचित परामर्श उपलब्ध होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय दृष्टिकोण और प्रभावशीलता दोनों





