अल्मोड़ा, 17 जुलाई 2025।
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज का प्रसूति विभाग इन दिनों जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाओं को लगातार “हायर सेंटर” रेफर किए जाने से न सिर्फ महिलाओं को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उनके परिजन भी मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं। जनता की इस पीड़ा की आवाज आज रेडक्रॉस सोसायटी और नगर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक पार्षदों ने बुलंद की।
रेडक्रॉस पदाधिकारी मनोज सनवाल एवं पार्षद अमित साह ‘मोनू’ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रसूति विभाग की लापरवाही पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में प्रसव की सुविधाएं होते हुए भी अधिकांश मामलों में महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जिससे यह संस्थान एक “रेफरल सेंटर” बनकर रह गया है।
जनता पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ, प्रशासन मौन
पार्षद अमित साह ‘मोनू’ ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि,
> “सरकार करोड़ों रुपये मेडिकल कॉलेज पर खर्च कर रही है ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से महिलाएं प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। यह स्थिति अब असहनीय है।”
रेडक्रॉस पदाधिकारी मनोज सनवाल ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय और गरीब महिलाएं जब मेडिकल कॉलेज में इलाज की आस लेकर आती हैं और उन्हें रेफर कर दिया जाता है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी है।
डीएम ने दिया 25 जुलाई तक सुधार का आश्वासन
जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से वार्ता की और 25 जुलाई तक प्रसव व्यवस्था में आवश्यक सुधार का आश्वासन दिया। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने साफ कर दिया कि यदि इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
भविष्य की चेतावनी, जनता की उम्मीदें
पार्षदों ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने चेतावनी के बावजूद भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो आम जनता के साथ मिलकर बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा।
> “यह केवल एक विभाग की लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा विश्वासघात है,” पार्षदों ने दो टूक कहा।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे उपस्थित
ज्ञापन देने वालों में रेडक्रॉस अध्यक्ष आशीष वर्मा, मनोज सनवाल, दीप जोशी, पार्षद अर्जुन बिष्ट, वंदना वर्मा, अंजू बिष्ट, ज्योति साह, आशा बिष्ट, राहुल जोशी, मीरा मिश्रा, पूनम त्रिपाठी, नेहा टम्टा, संजय कुमार जोशी, अभिषेक जोशी, मनोज भंडारी, श्याम पांडेय, विजय भट्ट, कपिल मल्होत्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और अल्मोड़ा की महिलाओं को प्रसव जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवा उनके अपने जिले में ही मिलती है या नहीं। जनता की निगाहें अब
25 जुलाई की डेड लाइन पर टिकी हैं।

