अल्मोड़ा, 19 अगस्त 2026। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (एसएसजेजीआईएमएस एंड आर), अल्मोड़ा में जूनोटिक बीमारियों की निगरानी, शीघ्र पहचान एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर एक दिवसीय इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय जूनोटिक रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NOHP-PCZ) के अंतर्गत स्थापित सेंटिनल सर्विलांस साइट फॉर जूनोज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का विषय “Induction Training on Surveillance of Zoonotic Diseases” रहा।
कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जी. एस. तितियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि पर्वतीय एवं वनाच्छादित क्षेत्रों में पशु-पक्षियों से मनुष्यों में फैलने वाली जूनोटिक बीमारियां जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती हैं। स्क्रब टाइफस, रेबीज, ब्रुसेलोसिस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ने वाला ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण ही इन रोगों पर प्रभावी नियंत्रण का आधार बन सकता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश पुनेरा ने अस्पताल की ओपीडी एवं आईपीडी में आने वाले संदिग्ध मरीजों में प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, समय पर जांच तथा मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल के पालन पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के दौरान नोडल अधिकारी (NOHP-PCZ) एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विक्रांत नेगी ने सेंटिनल सर्विलांस साइट अल्मोड़ा की गतिविधियों के साथ ही कुमाऊं मंडल में जूनोटिक रोगों के आंकड़ों, उनके रुझानों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने ओपीडी एवं भर्ती मरीजों में मानक केस डेफिनिशन लागू करने तथा रोगों की शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. अंशुल ममगाईं ने ‘डिटेक्ट, रिपोर्ट, रिस्पॉन्ड’ रणनीति के माध्यम से जूनोटिक रोगों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई।
डॉ. रवि सैनी के मॉडरेशन में सर्विलांस साइट स्टाफ सुश्री कविता एवं सुश्री प्रिया ने प्रतिभागियों को केस रिकॉर्ड फॉर्म (CRF) भरने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। रक्त केंद्र प्रभारी डॉ. आशीष जैन ने सुरक्षित सैंपल कलेक्शन, पैकेजिंग, स्टोरेज तथा कोल्ड-चेन के माध्यम से सैंपल ट्रांसपोर्टेशन के मानकों की जानकारी दी।
डॉ. रजत प्रकाश ने संभावित आउटब्रेक के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की संक्रमण से सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों एवं आवश्यक सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसर हेम बहुगुणा ने किया तथा महामारी विज्ञान के सामाजिक पक्षों पर मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला में डॉ. उर्मिला पलड़िया, डॉ. एम. अनुराधा, डॉ. अमित आर्य, डॉ. नौशीन, आईडीएसपी के एपिडेमियोलॉजिस्ट श्री नरेंद्र, माइक्रोबायोलॉजिस्ट श्री अभिषेक मेहरा सहित मेडिकल कॉलेज के विभिन्न क्लीनिकल विभागों के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर्स, नर्सिंग अधिकारी एवं प्रयोगशाला प्राविधिक मौजूद रहे।
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों का प्री-टेस्ट एवं पोस्ट-टेस्ट मूल्यांकन, इंटरैक्टिव केस डिस्कशन तथा व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जूनोटिक रोगों की प्रभावी रोकथाम के लिए मजबूत सर्विलांस, समयबद्ध रिपोर्टिंग और विभिन्न स्वास्थ्य क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।





