अल्मोड़ा/हल्द्वानी, 27 अगस्त। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को देशभर में श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन, गायत्री जयंती एवं संस्कृत दिवस सहित विभिन्न धार्मिक पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाएंगे। यह दिन स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. मदन मोहन पाठक ने बताया कि इस वर्ष 28 अगस्त को होने वाला आंशिक चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में यह ग्रहण अदृश्य रहने के कारण यहां इसके संबंध में सूतक आदि को लेकर किसी प्रकार की धार्मिक बाध्यता नहीं रहेगी। खगोलीय गणनाओं के अनुसार भी 28 अगस्त का यह चंद्रग्रहण भारत से दिखाई नहीं देने वाला है।
भद्रा का नहीं रहेगा प्रभाव
डॉ. पाठक ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए राखी बांधने के लिए भद्रा की बाधा नहीं रहेगी। उपलब्ध पंचांग गणनाओं में 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि प्रातः तक विद्यमान रहेगी और भद्रा समाप्त होने के बाद रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक एवं धार्मिक पर्व में केवल किसी एक क्षण को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति नहीं बनानी चाहिए। बहनें अपने भाई को श्रद्धापूर्वक रक्षासूत्र बांध सकती हैं। हालांकि इस वर्ष पूर्णिमा तिथि अल्प अवधि की होने के कारण जो लोग शास्त्रीय विधि से श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत परिवर्तन अथवा जनेऊ धारण करते हैं, उनके लिए प्रातःकाल का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
सुबह का समय श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन के लिए श्रेष्ठ
डॉ. पाठक ने बताया कि सुबह लगभग 9 बजे तक यज्ञोपवीत धारण एवं श्रावणी उपाकर्म की विधि पूर्ण कर लेना श्रेष्ठ रहेगा। पंचांग गणनाओं में पूर्णिमा तिथि का समापन लगभग सुबह 9:48 बजे बताया गया है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रातःकाल को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश बहन अपने भाई के पास सुबह समय पर नहीं पहुंच पाती है तो इसे लेकर घबराने या किसी प्रकार का भ्रम पालने की आवश्यकता नहीं है। रक्षाबंधन का मूल भाव भाई-बहन के स्नेह, विश्वास, मंगलकामना और रक्षा-संकल्प में निहित है।
श्रावणी उपाकर्म का विशेष महत्व
यजुर्वेदी परंपरा में श्रावणी उपाकर्म का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवसर पर विधिपूर्वक स्नान, संकल्प, ऋषि पूजन, यज्ञोपवीत परिवर्तन तथा वेदाध्ययन से जुड़े संस्कार किए जाते हैं। ब्राह्मण एवं वेदाध्ययन की परंपरा से जुड़े लोग शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार इस संस्कार को संपन्न करते हैं।
इसी दिन गायत्री जयंती और संस्कृत दिवस का भी विशेष महत्व है। संस्कृत को भारतीय ज्ञान, वेद, उपनिषद, दर्शन और शास्त्रीय परंपरा की प्रमुख भाषा बताते हुए डॉ. पाठक ने कहा कि संस्कृत दिवस भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है।
रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र संबंध का पर्व
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास, स्नेह और परस्पर दायित्व का प्रतीक है। बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगल की कामना करती है तथा भाई बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि पर्व को लेकर सोशल मीडिया अथवा अपूर्ण जानकारी के आधार पर किसी प्रकार की भ्रांति में न पड़ें और अपने स्थानीय पंचांग तथा परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करें।
चंद्रग्रहण को लेकर स्पष्ट रहें
डॉ. पाठक ने विशेष रूप से कहा कि 28 अगस्त का चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय क्षेत्र में इसे लेकर अनावश्यक भय या भ्रम की आवश्यकता नहीं है। खगोलीय घटना का होना अलग बात है और उसका किसी स्थान से दिखाई देना अलग। भारत से ग्रहण अदृश्य होने के कारण यहां सामान्य धार्मिक पर्वों को लेकर ग्रहणजनित बाधा की स्थिति नहीं बनती।
उन्होंने कहा कि 28 अगस्त का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है—श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन, गायत्री जयंती, संस्कृत दिवस तथा स्नान-दान का पर्व एक साथ आने से इसकी विशेषता और बढ़ जाती है।
— पंडित डॉ. मदन मोहन पाठक
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य
श्री हरि ज्योतिष अनुसंधान योग एवं कर्मकांड संस्थान
(संबद्ध—भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान, वाराणसी)
33 वर्षों से अधिक ज्योतिषीय अनुभव




