हल्द्वानी, 02 जुलाई 2026।
जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने गुरुवार को आयोजित विभिन्न बैठकों में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण, डेंगू नियंत्रण तथा क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण पर सख्त कार्रवाई, सूचना देने पर ₹50 हजार का इनाम
पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला सलाहकार समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत को दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनपद में किसी भी स्तर पर भ्रूण लिंग परीक्षण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संदिग्ध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर तत्काल छापेमारी की जाए तथा बिना पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग करने वालों की सूचना देने वाले को ₹50,000 का पुरस्कार दिया जाएगा। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि सभी रेडियोलॉजिस्ट एवं सोनोलॉजिस्ट का अधिनियम के तहत वैध पंजीकरण अनिवार्य है। बिना पंजीकरण अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन कानूनन अपराध है।
डेंगू नियंत्रण को लेकर सभी विभाग अलर्ट मोड पर
मानसून के दौरान डेंगू की रोकथाम एवं नियंत्रण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य, नगर विकास और पंचायतीराज विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित सर्विलांस, समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने के साथ ही नालियों की सफाई, जलभराव की समस्या का त्वरित समाधान, फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव अभियान तेज करने के निर्देश दिए।
साथ ही विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखने तथा लोगों को घरों में कूलर, गमले, टायर और अन्य पात्रों में पानी जमा न होने देने के प्रति जागरूक करने को कहा।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि डेंगू के संदिग्ध मामलों की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने लोगों से अपील की कि पूर्ण बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी एवं मच्छररोधी उपाय अपनाएं तथा बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि एक्ट के तहत प्रत्येक मरीज का इलेक्ट्रॉनिक एवं मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य है। यह अधिनियम मेटरनिटी होम, डिस्पेंसरी, क्लीनिक, नर्सिंग होम तथा एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर समान रूप से लागू होता है।
उन्होंने बताया कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आपातकालीन स्थिति में पहुंचे मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्थान की कानूनी जिम्मेदारी है।
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत सहित स्वास्थ्य एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।




