अल्मोड़ा, 16 मार्च 2026।
भारत सरकार के गृह सचिव द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत प्ली बार्गेनिंग संबंधी प्रावधानों के बारे में व्यापक जन-जागरूकता फैलाने की पहल शुरू की गई है। उत्तराखंड शासन के निर्देशन में आम नागरिकों को इस महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था की जानकारी देने के लिए जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अध्याय XXIII में प्ली बार्गेनिंग से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य आपराधिक मामलों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण को बढ़ावा देना है, ताकि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम हो सके और न्याय प्रक्रिया अधिक सरल व तेज बन सके।
प्रावधान के अनुसार ऐसे मामलों में, जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष तक का प्रावधान है और जो गंभीर श्रेणी के अपराधों में शामिल नहीं हैं, आरोपी को आरोप निर्धारण की तिथि से 30 दिनों के भीतर न्यायालय में प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन करने का अधिकार होता है। इस प्रक्रिया के तहत न्यायालय की निगरानी में अभियोजन पक्ष और अभियुक्त आपसी सहमति से मामले का समाधान कर सकते हैं।
प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से मुकदमों में लगने वाले समय, खर्च और अनिश्चितता को कम करने में मदद मिलती है तथा न्याय प्रणाली की कार्यकुशलता में भी वृद्धि होती है। इसी उद्देश्य से शासन द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक लोगों तक इस प्रावधान की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि नागरिक इसका लाभ उठा सकें।
क्या है प्ली बार्गेनिंग?
प्ली बार्गेनिंग आपराधिक कानून की एक प्रक्रिया है, जिसमें आरोपी अभियोजन पक्ष से कुछ रियायतों के बदले अपराध स्वीकार करने या उसका विरोध न करने पर सहमत हो सकता है। इन रियायतों में आरोपों की गंभीरता कम करना, कुछ आरोपों को हटाना या कम सजा की सिफारिश करना शामिल हो सकता है। यह प्रक्रिया आपराधिक मामलों के तेजी से निपटारे में सहायक मानी जाती है।





