Uttarakhand News : क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चाय को आप रोज पीते हैं, वह आपके कप तक पहुंचने से पहले कितनी मेहनत और संघर्ष का सफर तय करती है. कौसानी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ चाय बागानों के लिए भी देशभर में मशहूर है. यहां बड़ी संख्या में महिलाएं चाय बागानों में मजदूरी करती हैं. मंजू देवी लोकल 18 से बताती हैं कि उन्हें 8 घंटे लगातार काम करना पड़ता है. इसके बदले 200 रुपये मजदूरी मिलती है. दिनभर झुककर पत्तियां तोड़ना आसान काम नहीं. पत्तियां तोड़ने के बाद उन्हें फैक्ट्री तक पहुंचाना भी है. वजन और गुणवत्ता के आधार पर उनकी हाजिरी दर्ज की जाती है.






