चम्पावत। हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला राजनीतिक रंग लेने लगा है। भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं दर्जा राज्यमंत्री श्याम नारायण पांडे ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा ड्यूटी पर तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
पांडे ने कहा कि रैली, जुलूस अथवा किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसी दायित्व के तहत एसएसपी एवं पुलिस अधिकारी मौके पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से दुर्व्यवहार किया जाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन विरोध की भाषा और व्यवहार में मर्यादा होना जरूरी है। पुलिस अधिकारी भी संवैधानिक व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार करने से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि पूरे पुलिस बल के मनोबल पर भी असर पड़ता है।
भाजपा नेता ने कहा, “आईपीएस अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आ सकता है, लेकिन राजनीतिक पद पर बैठा व्यक्ति आईपीएस अधिकारी नहीं बन सकता।” उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी दिन-रात जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए कार्य करते हैं। इसलिए उनके पद और जिम्मेदारियों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का दायित्व है।
पांडे ने घटना से संबंधित सामने आए वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे देखकर आम लोगों में भी नाराजगी है। उन्होंने मांग की कि घटना में शामिल जिम्मेदार लोग वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और आम जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और कानून-व्यवस्था का सम्मान करना सभी की समान जिम्मेदारी है। राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत आक्रोश और अभद्र व्यवहार में बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं है।
पांडे ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों से समाज अधिक जिम्मेदार और मर्यादित आचरण की अपेक्षा करता है। राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन कानून और वर्दी की गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए।




