नैनीताल, 16 जून 2026।
जनपद में पशुओं के लिए आवश्यक सूखे चारे (भूसा) की बढ़ती कीमतों और संभावित कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने शासन के निर्देशों के अनुपालन में आदेश जारी करते हुए भूसे के अनावश्यक भंडारण तथा राज्य से बाहर परिवहन पर तत्काल प्रभाव से 15 दिनों की रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड में पशुपालकों द्वारा पशुओं के सूखे चारे के रूप में मुख्य रूप से गेहूं के भूसे का उपयोग किया जाता है। हर वर्ष अप्रैल और मई में गेहूं की फसल कटने के बाद भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है तथा इसी अवधि में इसकी कीमतें भी अपेक्षाकृत कम होती हैं। ऐसे में उन्नतशील पशुपालक एवं निराश्रित तथा अलाभकारी गोवंश की देखभाल करने वाले गोसदन अपनी आवश्यकतानुसार भूसे का भंडारण करते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ व्यापारियों द्वारा बड़ी मात्रा में भूसे के अनावश्यक भंडारण की आशंका रहती है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी उत्पन्न हो सकती है। भूसे की कमी होने पर पशुपालकों के समक्ष गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और पशुओं को परित्यक्त किए जाने की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे कृषि फसलों को नुकसान, सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि तथा कानून-व्यवस्था की समस्याएं उत्पन्न होने की संभावना रहती है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त नगर निगम हल्द्वानी, सभी उपजिलाधिकारियों तथा नगर निकायों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि आगामी 15 दिनों तक भूसे का उपयोग ईंट भट्टों एवं अन्य उद्योगों में नहीं किया जाएगा तथा इन संस्थानों को भूसे की बिक्री पर भी रोक रहेगी।
इसके अतिरिक्त भूसा विक्रेताओं द्वारा अनावश्यक भंडारण और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद में उत्पादित भूसे को राज्य की सीमाओं से बाहर ले जाने पर भी तत्काल प्रभाव से एक पक्ष अर्थात 15 दिनों तक प्रतिबंध लगाया गया है।
जिलाधिकारी ने पुआल जलाने की घटनाओं पर भी तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं तथा संबंधित अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। प्रशासन का मानना है कि इन कदमों से पशुपालकों को राहत मिलेगी और पशुओं के लिए आवश्यक चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।





