लेखक – डॉ. मदन मोहन पाठक
उत्तराखंड अपनी भौगोलिक विषमताओं, सीमावर्ती संवेदनशीलता, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत के कारण देश के अन्य राज्यों से भिन्न पहचान रखता है। ऐसे राज्य में विकास की गति बनाए रखना किसी भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार ने विकास, सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को केंद्र में रखकर अनेक ऐसे कार्य किए हैं जिनका प्रभाव प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
आधारभूत संरचना विकास की नई तस्वीर
धामी सरकार के कार्यकाल में सड़क, पुल, पेयजल और विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। सीमांत क्षेत्रों में संपर्क मार्गों का विस्तार किया गया तथा ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक सड़क परियोजनाएं स्वीकृत और पूर्ण की गईं।
ऑल वेदर रोड परियोजना, पर्वतीय जिलों में सड़क सुधार, नए पुलों का निर्माण तथा चारधाम यात्रा मार्गों का सुदृढ़ीकरण राज्य के विकास की आधारशिला बने हैं। इससे न केवल आवागमन सुगम हुआ है बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।
निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक पहल
उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया। विभिन्न औद्योगिक समूहों और कंपनियों के साथ हुए निवेश समझौतों ने उत्तराखंड को निवेश के नए गंतव्य के रूप में स्थापित किया है।
सरकार का दावा है कि निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्वरोजगार योजनाओं, स्टार्टअप प्रोत्साहन तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन को भी बढ़ावा दिया गया है।
पर्यटन क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धामी सरकार ने धार्मिक, सांस्कृतिक, साहसिक और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।
चारधाम यात्रा प्रबंधन में तकनीकी सुधार, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं, होम-स्टे योजना का विस्तार तथा सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास उल्लेखनीय हैं। कैंची धाम, जागेश्वर, आदि कैलाश, ओम पर्वत और मानसखंड क्षेत्र के विकास से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हुई है।
स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण
सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता तथा टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिला है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उपचार की सुविधा भी प्राप्त हो रही है।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं तथा आधुनिक शिक्षण संसाधनों के उपयोग पर बल दिया गया है।
राज्य के विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास भी किए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन दिया गया। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
सरकारी नौकरियों में महिलाओं को आरक्षण संबंधी निर्णय तथा महिला सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
समान नागरिक संहिता : राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। इस पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया और राज्य को एक नई पहचान प्रदान की।
सरकार का मत है कि यह कदम सामाजिक समानता और न्याय को मजबूत करेगा, जबकि इस विषय पर विभिन्न मत भी सामने आए हैं। फिर भी यह निर्णय राज्य की नीति-निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
भ्रष्टाचार और नकल माफिया पर कार्रवाई
धामी सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में नकल और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की। नकल विरोधी कानून लागू कर राज्य ने युवाओं में विश्वास पैदा करने का प्रयास किया।
कई मामलों में गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जाएगा।
सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान
चीन और नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, सड़क निर्माण, संचार सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं संचालित की गईं।
“वाइब्रेंट विलेज” जैसी अवधारणाओं के अनुरूप सीमांत गांवों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई ताकि पलायन को रोका जा सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल
कृषि, बागवानी, दुग्ध उत्पादन तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गईं। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित गतिविधियों के विस्तार से आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं विकसित हुई हैं।
सुशासन और डिजिटल प्रशासन
ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण से जनता को सुविधाएं प्राप्त हुई हैं। विभिन्न विभागों की सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने के प्रयासों ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास, निवेश, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण पहलें देखी हैं। चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं—विशेषकर पलायन, पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और पर्यावरणीय संतुलन जैसी समस्याएं—लेकिन इन चुनौतियों के बीच सरकार ने विकास की नई संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास किया है।
उत्तराखंड के विकास की वास्तविक सफलता का आकलन आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के स्थायी परिणामों और जनता के जीवन स्तर में आए बदलावों से होगा। फिर भी यह कहा जा सकता है कि धामी सरकार ने राज्य को विकास, निवेश और सुशासन की नई दिशा देने का प्रयास किया है, जिसने उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है।





