Bageshwar News : उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से कई चीजें मिल जाती हैं. इन्हीं में से एक शिणुक है. लोकल 18 से बागेश्वर की सुनीता टम्टा बताती हैं कि शिणुक की पतली डंडियों को नाक और कान में लगाया जाता है. पहाड़ों में बच्चियों के जन्म के कुछ वर्षों बाद ही उनके कान और नाक छिदवा दिए जाते हैं. आगे चलकर नथ, बुलाक, मुर्की और अन्य आभूषणों को पहनने के लिए कान और नाक के छेद बड़े होने चाहिए. इसी वजह से बचपन से ही छेदों को सुरक्षित रखने की परंपरा विकसित हुई. शिणुक इसी आवश्यकता को पूरा करती है. लंबे समय तक गहने न पहने जाएं तो छेद सिकुड़ सकते हैं. इसलिए शिणुक को बीच-बीच में लगाया जाता है. आज भी यह परंपरा ग्रामीण समाज में जीवित है.





