नई दिल्ली/हल्द्वानी। उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए इस प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया है। बुधवार को जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के हल्द्वानी स्थानांतरण पर लगी प्रमुख कानूनी बाधा को समाप्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट अपने न्यायिक अधिकारों का उपयोग करते हुए वकीलों और आम जनता के बीच जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने का निर्देश नहीं दे सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा आदेश न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे निरस्त किया जाता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हाई कोर्ट के नए परिसर के लिए प्रस्तावित भूमि का हस्तांतरण किया जाए तथा स्थानांतरण से जुड़ी सभी आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी मंजूरियां छह सप्ताह के भीतर पूरी की जाएं।
यह फैसला उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। लंबे समय से हाई कोर्ट को हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में स्थानांतरित करने की योजना विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कारणों से अटकी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब नए हाई कोर्ट परिसर के निर्माण और स्थानांतरण की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
इस निर्णय के बाद कुमाऊं क्षेत्र के लाखों लोगों को न्यायिक सुविधाएं अधिक सुलभ होने की उम्मीद है, जबकि नैनीताल से हाई कोर्ट के स्थानांतरण को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद भी निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।





