नैनीताल/भीमताल/हल्द्वानी | 27 जून 2026
जनपद नैनीताल में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूले जाने पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण और वसूली को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की इस पहल से हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
जांच में सामने आया कि कई निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अलावा प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य मदों के नाम पर अभिभावकों से अनाधिकृत धनराशि वसूल रहे थे। अब जारी आदेश के अनुसार प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक और औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण शुल्क एवं परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में रखा जाएगा, जिसे न्यूनतम रखना होगा और इसके लिए PTA की स्वीकृति अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क लेना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
📌 तीन साल में सिर्फ 10% तक ही बढ़ेगी फीस
राज्य सरकार की एनओसी शर्तों के अनुसार अब निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे। इसके लिए भी अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की मंजूरी आवश्यक होगी। मनमानी फीस बढ़ोतरी को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
📚 परीक्षा शुल्क और टीसी शुल्क भी तय
विद्यालयों को पूरे सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड ही कराए जा सकेंगे। परीक्षा शुल्क वास्तविक खर्च के आधार पर लिया जाएगा और किसी भी कक्षा के लिए ₹600 से अधिक नहीं होगा, जबकि टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) शुल्क मात्र ₹1 निर्धारित किया गया है।
💳 एकमुश्त फीस जमा करने की नहीं होगी मजबूरी
अभिभावकों को शुल्क भुगतान के लिए मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा वार्षिक विकल्प उपलब्ध कराना होगा। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद देना विद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा।
💰 अतिरिक्त वसूली लौटानी होगी
सबसे अहम आदेश के तहत सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूली गई अतिरिक्त राशि का समायोजन 1 जुलाई 2026 की फीस में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त वसूली जुलाई की फीस से अधिक है तो शेष राशि आगामी महीनों की फीस में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिनों के भीतर इसका प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को सौंपना होगा।
⚠️ नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर आरटीई एक्ट के तहत ₹1 लाख, तथा सीबीएसई बायलॉज के तहत ₹5 लाख तक का जुर्माना, साथ ही मान्यता रद्द, एनओसी निरस्त करने जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
👉 जिला प्रशासन की यह पहल निजी विद्यालयों की फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है।




